रविवार, ६ जुलाई २००८

जाने तू या जाने न

रेटिंग ****
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आमीर खान युवाओं की नब्ज बखूबी पहचानते हैं और लेखक से निर्देशक बने अब्बास टायरवाला अभी खुद युवा हैं, इस लिए जाने तू या जाने न के जरिए उन्होंने टार्गेट ऑडियेंस को पूरी तरह से खुश कर लिया है।

स्टार कास्ट
इमरान खान
जेनीलिया
नसरुद्दीन शाह
रत्ना पाठक शाह
परेश रावल
सोहेल खान
अरबाज खान
डायरेक्टर
अब्बास टायरवाला

कहानी जय (इमरान खान) और अदिती (जेनीलिया) की है, जिनका पूरा फ्रेंड्स ग्रुप और पेरेंट्स मानते हैं कि वह एक दूसरे को प्यार करते हैं, लेकिन खुद उन्हें ही अहसास नहीं होता। फिर जय की जिंदगी में मेघना (मंजरी) और अदिती की जिंदगी में सुशांत (अयाज खान) आते हैं, तभी दोनों दोस्तों को दिल में छिपे प्यार का अहसास होता है। कहानी रुटीन है और क्लाइमेक्स भी कई फिल्मों में देखा हुआ। डिफरेंट है तो ट्रीटमेंट, सबसे बड़ी बात आमिर और अब्बास ने फिल्म को मेट्रो शहरों के आम युवा से सहजता से जोड़ा है। लव स्टोरी में पेरेंट्स-बेटी, मां-बेटा, भाई-बहन के रिश्ते पिसे नहीं हैं। यही वजह है कि हर युवा खुद को कहानी से रिलेट कर सकता है। इमरान पहली ही फिल्म में अदाकारी की पुख्तगी का अहसास करवाते हैं। जेनेलिया भी गहरी छाप छोड़ती हैं। दोस्तों के ग्रुप में अनुराधा पटेल, जयंत, अलिशका, निरव, कर्न, सुगंधा, प्रतीक, रेणुका सबने अपने किरदार को बखूबी जिया है। रत्ना पाठक शाह और नसरूद्दीन की केमिस्ट्री हम पांच की याद दिलवाती है। दोनों ही शानदार हैं। परेश रावल छोटे से किरदार में जोरदार हैं। सोहेल और अब्बास जरुर इरीटेट करते हैं। एआर रहमान के दो गाने पप्पू को डांस नहीं आता और कहो न कहो पहले ही हिट हो चुके हैं।
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रेटिंग चिन्ह---*पैसा बर्बाद/ **बस ठीक ठाक है/ *** पैसा वसूल/ ****जरूर देखें/ ****बेहतरीन

शुक्रवार, ४ जुलाई २००८

लव स्टोरीः आधी 2008 बाकी 2050

रेटिंग ***
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हवा में उड़ती कारें, उंगली के इशारे पर काम करती घरों की दीवारे, आगे पीछे घूमते और हुक्म बजाते रोबोट और मीशीनी जिंदगी में कहीं पनपती एक लव-स्टोरी। यही है लव स्टोरी 2050 की कहानी। भई फिल्म का नाम 2050 है, लेकिन आधी फिल्म तो 2008 में ही गुजर जाती है।

स्टार कास्ट
हरमन बवेजा
प्रियंका चोपड़ा
बोमन इरानी
अर्चना पूर्ण सिंह
डायरेक्टर
हैरी बवेजा
शूटिंग लोकेशन
आस्ट्रेलिया, न्यू यार्क, मुंबई
वो भी मौजूदा मुंबईया स्टाइल लव स्टोरी में जिसमें प्रेमी हर रोज 'होने वाली प्रेमिका' के घर के चक्कर लगाता है, वो रोज डेट पर जाने के लिए मना करती है और फिर मान जाती है। लेकिन हैरी बवेजा ने इस बात को दो-तीन बार रिपीट करके तेजी से शुरू हुए पहले हाफ को कुछ ही देर बाद धीमा और बोर बना देता है। फिर भी अच्छी ओपनिंग, खास कर तेज़ रफ्तार पसंद करने वाले युवाओं को बांधने में कामयाब रहे हैं। हरमन बवेजा की एंट्री भी ठीक ठाक रही है। फिल्म की कहानी रुटीन लव स्टोरीज जैसी है, जिसमें पहले जन्म में प्रेमिका की मौत के बाद प्रेमी उसे ढूंढता फिरता है। बस इसमें नया ये है कि इस बार पुर्नजन्म की बजाए प्रेमी टाइम मशीन में बैठ कर 42 साल आगे चला जाता है। लेकिन घबराइए मत पहले हाफ से निराश होकर सिनेमा हाल छोड़ कर मत जाइए, दूसरे हाफ में फिल्म सब को चकित करती है। खास कर 2050 में कल्पित रोबो वल्र्ड हवा में उड़ती कारें, आसमान से उलटी लटक कर चलती ट्रेंन, वर्चुयल नियोन साइन बोर्ड और बोलते यूनीपोल, हवा में तैरती स्टेज के साथ ही मुंबई में हजारों मंजिली इमारतों के साथ ही समंदर में बनाए गए शीशे के घर आपको जरुर अकर्षित करेंगे। एडवांस दौर में हर काम में मदद करते रोबोट आपको काफी क्यूट लगेंगे। खास कर प्रिंयका चोपड़़ा का नन्हां पिंंक रोबो, जो उसके दिल में पनपते प्यार को न सिर्फ बखूबी समझता है, बल्कि हीरो के रोबो से सारी बातें शेयर भी करता है। हैरी बवेजा ने अपने बेटे को स्थापित करने के लिए स्क्रिप्ट और सक्रीन प्ले पर खास ध्यान दिया है। यहां तक कि खतरनाक ताकतों वाला विलेन उस पर हावी न हो उसके चेहरे को नकाब में ही रखा गया है। एक्टिंग की बात करें तो विभिन्न इमोशंस को एक्सप्रेस करने में हरमन काफी हद तक सफल रहें हैं, फिर भी उन्हें काफी मेहनत करनी होगी। जो लोग उनके चेहरे को ऋतिक रोशन से मिला रहे हैं, उन्हें हरमन में कुछ डिफरेंट देखने को मिलेगा। डांस, एक्शन, रोमांस, इमोशनल, ट्रेजेडी और कॉमेडी हर तरह के सीन फिल्म में उनके लिए खास तौर पर रखे गए हैं, शायद पापा हैरी साबित करना चाहते थे कि जूनियर बवेजा में पूरा फिल्मी मैटिरियल है। प्रियंका एतराज के बाद एक बार फिर काफी हॉट और सेक्सी लगी हैं। चाहे ड्रेसेस हों या सेकेंड हॉफ में 2050 की स्टाइल उनकी हर चीज में गलैमर देखने को मिला है। बोमन इरानी भी अपने किरदार को जी गए हैं। अर्चना पूर्ण सिंह भी ठीक ठाक लगी हैं। म्यूजिक के मामले में अनु मलिक इस बार भी निराश ही करते हैं। मीलों का फासला खास कर सैड वर्शन जरुर प्रभाव छोड़ता है। खैर सभी चीजों का गुलदस्ता सजा हैरी बवेजा का निर्देशन लोगों को बांधने में सफल रहा है, अगर वह पहले हाफ में थोड़ी कैंची चलाने का साहस दिखाते तो सक्रीनप्ले में और कसाव आता। विजय अरोड़ा और किरण दियोहंस की सिनेमेटोग्राफी भी फिल्म का साकारात्मक पक्ष है। खास कर आस्ट्रेलिया के समंदर के आस पास की लोकेशंस को उन्होंने खूबसूरती से फिल्माया है। ग्राफिक्स के पीछे नजर आता मुंबई भी उनके कैमरा वर्क को बखूबी दिखाता है। ग्राफिक्स के मामले में लव स्टोरी 2050 को बॉलीवुड में क्रांति कहा जा सकता है। अगर ऐसी फिल्में बनने लगे तो बॉलीवुड का हॉलीवुड करन होने में देर नहीं लगेगी। फिल्म युवाओं को तो जरुर आकर्षित करेगी, लेकिन उससे पहली पीढ़ी को दूसरे हाफ में वीडियो गेम्स पर आधारित फाइटिंग सीन्स शायद ही समझ आएं। फिल्म में एक और चीज काबिले जिक्र है वनिता उमंग कुमार का आर्ट, 2050 की तकनीकी दुनिया को उभारने में उनका आर्ट वर्क खास भूमिका निभाता ही है, उसमें भारतीय संस्कृति की छाप भी नजर आती है। खास कर प्रियंका चोपड़ा द्वारा कमरे का रंग गुलाबी करने वाले सीन में दीवारों पर लिखे श्लोकों में इसकी झलक मिलती है। पिक्चर अभी बाकी है दोस्त एक और सरप्राइज फिल्म में हरमन बवेजा का क्लोन भी देखने को मिलेगा, सो कम ऑन दोस्तो हरमन को हरमन से लड़ते देखते हैं।
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रेटिंग चिन्ह---*पैसा बर्बाद/ **बस ठीक ठाक है/ *** पैसा वसूल/ ****जरूर देखें/ ****बेहतरीन

बुधवार, ११ जून २००८

देखा-सुना फ़ोरम-क्या यौन शिक्षा दी जानी चाहिए

दोस्तो जैसे कि हमने कुछ दिन पहले देखा सुना फ़ोरम शुरू करने की घोषणा की थी उसी कङी में हम पहला विषय लेकर आए हैं। जिसे संचालक मंडल के सदस्य सजीव सारथी ने रखा है। यही नहीं देखा सुना ने हर बुधवार एक विषय पर चर्चा करने का फ़ैसला किया है, सो आप सब भी विषय रख सकते हैं। हमें आपके विषय पर विचार कर खुशी होगी। जैसे कि आप सब जानते ही हैं कि देखा सुना ने जो फोरम शुरू किया है, वह अपने पाठकों अपनी राय टिप्पणीयों के बाहर सीधे मुख्य विषय में रखने की सुविधा देता है, इस लिए हमें खुशी होगी की आप देखा सुना फोरम पर जाकर ही अपने विचार रखें।



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देखा सुना फोरम के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां कलिक करें या अधिक जानकारी के लिए sajeevsarathie@gmail.com या jjournalist007@gmail.com ईमेल कर सकते हैं। आप सब के विचारों, सुझावों और सहयोग का हमेशा इंतजार रहेगा।
इस हफ्ते का विषय ये है।
कोडम बनाने वाली कम्पनियाँ जहाँ दावा करती हैं कि उनके उत्पाद लोगों कि कामेच्छा बढाने में कामयाब रहे हैं, तो वहीं विशेषज्ञों कि मानें तो अधिकतर भारतीयों को सेक्स कि सही विधि भी ज्ञात नही है, दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स ), शादी के लिए तैयार युवक युवतियों को सेक्स का क्रेश कोर्स करवा रही है जिसका नाम है प्री मैरिज कोर्स फॉर हैप्पी मैरिड लाइफ, अब यहाँ स्कूलों में सेक्स शिक्षा पर बहस एक बार फ़िर छिड गई है, विशेषज्ञ मानते हैं कि आज के समय में नौजवानों को एड्स जैसी बीमारियों से बचाने और जटिल होती सेक्स समस्यों से निपटने के लिए ये अति आवश्यक है, वहीं बाबा रामदेव सरीखा एक समूह इसे भारतीय परिपेक्ष में सही नही मानता, कुछ लोग कक्षा और उम्र कि किस पायदान पर ये चर्चा हो इस पर मतभेद रखते हैं तो कुछ लोग कामसूत्र जैसी भारतीय सेक्स ज्ञान पुस्तक को पाठ्यक्रम में शामिल करने की वकालत करते हैं. अब मुद्दा आपके सामने हैं खुल कर अपने विचार रखें, हो सकता है इस सार्थक बहस से हम कुछ बेहतर परिणाम निकल पायें -
सवाल है,
१. क्या स्कूलों में यौन शिक्षा दी जानी चाहिए?
२. यदि नही, तो क्यों?
३. यदि हाँ तो किस कक्षा से इसकी शुरुवात हो?
कहिये खुलकर, क्या है आपकी राय -

निवेदक -
नियंत्रक, देखा सुना

शनिवार, ७ जून २००८

कायम रहेगा 'सरकार' का 'राज'

रेटिंग ****
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राम गोपाल वर्मा आग के दर्द को भुला सकते हैं, क्योंकि सरकार राज उस धुएं को उड़ा सकता है। 'सरकार' की 'सरकार राज' से तुलना होना स्वभाविक है और होनी भी चाहिए।
स्टार कास्ट
अमिताभ बच्चन
अभिषेक बच्चन
एश्वर्या राय
तनिशा मुखर्जी
गोविंद नामदेव
रवि काले
डायरेक्टर
राम गोपाल वर्मा
शूटिंग लोकेशन
हैदराबाद


रामू ने सरकार राज को सरकार की तरह सॉलिड बनाने की कोशिश की है और काफी हद तक कामयाब भी रहे हैं। फिल्म की कहानी महाराष्ट्र की राजनीति पर केंद्र्ति है। अन्य राज्यों के दर्शक पहले से महाराष्ट्र के राजनैतिक ड्रामे की खबरों से दुखी हैं, उन्हें जरूर ये बात अखर सकती है। सरकार की कहानी सरकार और उसके विरोधियों के इर्द गिर्द घूमती थी, जबकि सरकार राज की कहानी उसकी सत्ता हथियाने की है। उसके लिए की गई साजिश ही कहानी का केंद्र बिंदू है, लेकिन अंत तक दर्शक को ये बात पता ही नहीं चलती और न ही फिल्मकार ने बताई है। ये राज क्लाइमैक्स में जाकर खुलता है, जब शंकर द्वारा दुशमनों को खत्म करने के बाद अचानक एक दिन कोई उसे मरवा देता है। फिर सरकार अपनी राजनीतिक सोच और ताकत का प्रयोग करते हुए असलियत का पता लगाता है, जो दर्शकों को चौंकाने के लिए काफी है। सरकार राज की कहानी सरकार की सत्ता प्राप्ती के साथ ही राजनीति सहित ताकत के हर क्षेत्र में परिवारवाद के सत्य को उजागर करती है। मूवी का सबसे दमदार पक्ष है इसका बैकग्राउंड स्कोर, जो हर सीन में दर्शकों की आंखें स्पाट खोल देता है। दरअसल पहली फिल्म में रामू ने सरकार की ताकत और उसके उसूलों के साथ खड़ा किया है, जबकि सरकार राज में वह नए दौर और पीढ़ी के मुताबिक समझौते करते नजर आते हैं। पहले जहां दुनिया में उनके फैसले को इंकार करने की हिम्मत खुद उनका बेटा भी नहीं दिखा सकता और ये हिमाकत करने पर अपने सगे भाई को भी मार देता है।
वहीं दूसरी में सरकार के पोते को सरकार के गिफ्ट ही पसंद नहीं आते खैर ये कहानी का हिस्सा है। सरकार राज में पूरी ताकत शंकर (अभिषेक) के हाथ में है और वह कोई बड़ा फैसला लेने के लिए सरकार (अमिताभ बच्चन) से बस सलाह मात्र करता है। 5 गांव के 40 हजार लोगों को विस्थापित कर बिजली प्रोजेक्ट लगाने का प्रस्ताव लेकर अनिता (ऐश्वर्या रॉय) सरकार के पास पहुंचती है, जो वो रिजेक्ट कर देता है, लेकिन शंकर इसे अपने राज्य के विकास के लिए अहम मानकर उन्हें मना लेता है। दूसरी कड़ी में सरकार के गॉडफादर राओ साहब से भी मुलाकात होती है, जिनका क्रांतिकारी पोता भी सरकार की सत्ता को चुनौती देता है। रामू की डार्क शेड फिल्म दर्शक को बांधे रखती है। बिग बी और अभि दोनों ही एक्टिंग के मामले में एक-दूसरे के सिर चढ़ कर बोलते हैं। ऐश का किरदार एक बिजनेस विमन है, जो दिग्गजों की राजनीति में पिस सा गया है। फिर भी जितने दृश्य उनके हिस्से आए है, उनको उन्होंने पूरी जिम्मेदारी से निभाया है। खास कर आखिरी सीन तक आपको इंतजार करना होगा। ऐश्वर्य राय पूरी फिल्म में एक असहाय बिजनेस वुमन बनी रहती हैं, जो सरकार और राजनीति के अखाड़ को देखकर हैरान होती रहती हैं। इसी बीच शंकर और अनिता के बीच प्रेम भी पनपता है, जो उसे क्लाइमेक्स पर ताकतवर बना देती है। चंद्र के किरदार में रवि काले ने बेहतरीन एक्टिंग की है, जिसे समिक्षकों ने पूरी तरह नजरअंदाज किया है। पहले हाफ में कहानी तेजी से बनती है, लेकिन दूसरे हाफ में रफ्तार कुछ धीमी है और ये कहानी की मजबूरी लगती है। दूसरी बात ये कि कहानी खुद-ब-खुद आगे बढ़ाने की बजाए रामू ने अमिताभ के मुंह से सारे राज खुलवाए हैं। चोट खाए शेर की मानिंद अंत में अमिताभ काफी प्रभावित करते हैं। पूरी फिल्म में साजिश रच रहे सभी विलेन तो मोहरा मात्र हैं, सच्चाई तो अंत में ही सामने आती है। फिल्म का क्लाइमेक्स आपको पिछली फिल्म सा लगेगा, लेकिन है बिल्कुल सिर पर पहाड़ टूटने जैसा। खास बात ये है कि आरजीवी ने सरकार राज की कहानी को सशक्त बनाने के साथ ही इस कड़ी की तीसरी फिल्म का प्लाट तैयार करने पर भी भरपूर मेहनत की है, जो फिल्म में सपष्ट नजर आती है। थिएटर से बाहर निकलते हुए, दर्शक इसी बात पर चर्चा करते नजर आते हैं। राजनीति में सक्रिय भूमिका न निभा कर भी किस तरह किंगमेकरों का किंगमेकर अपनी 'सरकार' चलाता है। ये देखने के लिए आपको सरकार राज देख लेनी चाहिए। हां पहली शर्त ये है कि आपने पहले सरकार देखी हो
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रेटिंग चिन्ह---*पैसा बर्बाद/ **बस ठीक ठाक है/ *** पैसा वसूल/ ****जरूर देखें/ ****बेहतरीन

सोमवार, २६ मई २००८

दिल की बात-देखा सुना फोरम

सभी ब्लागर बंधुओं का आभारी हूं, जिन्होंने देखा सुना को लगातार सहयोग देकर हमें बेहतर काम करने का प्रोत्साहन दिया। देखा सुना को आपकी उम्मीदों पर खरा उतारने की हम भरपूर कोशिश कर रहें हैं। दोस्तो देखा सुना में हम अपने इर्द गिर्द देखी सुनी चीजों को अपने अहसासों के साथ बयान करने की कोशिश करते हैं। लगातार आपके सुझावों से इसे बेहतर बनाने की भी कोशिश जारी है। कुछ दिन पहले अंकित माथुर जी ने सुझाव दिया कि देखा सुना पर हम एक फोरम शुरू करें जिस पर लोग अपनी मर्जी के विचार दे सकें। उन्होंने एक तरीका भी सुझाया सो उस तरीके को प्रयोग करने की कोशिश कर रहा हूं।

उसी कड़ी में हम देखा सुना फोरम की शुरूआत कर रहे हैं। हम किसी भी टॉपिक से फोरम की शुरूआत करने की बजाए आप सभी से अनुरोध कर रहे हैं कि आप ही बताएं कि किन किन विषयों पर चर्चा की जाए। अपने पसंदीदा विषय सुझांए। हम आपकी पसंद पर आधारित विचार चर्चा शुरू कर खुशी महसूस करेंगे।

उदाहरण के तौर पर ये विषय देखें
क्या ब्लागिंग में एक दूसरे पर छींटाकशी वाजिब है
अगर आपको ये विषय उचित लगे तो अपने विचार भेंजे।

इस फोरम को प्रयोग करना बिल्कुल आसान है। बस आपको देखा सुना मे सबसे उपर नजर आ रहे






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के Enter My Forum बटन पर क्लिक करना है। उसके बाद आपके सामने फोरम पेज खुल जाएगा। (नीचे फोटो देखें)

आपकी बात नामक इस फोरम में विषयों की एक सूची नजर आएगी। आप उन में से किसी विषय को चुनने के लिए उस पर क्लिक कर सकते हैं। उदाहरण में स्वागतम को चुना गया है। (फोटो देखें) विषय चुनने पर ऐसा पेज खुलेगा।

उस पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए Reply पर क्लिक करें फार्म में अपनी जानकारी और संदेश भरकर मैसेज पोस्ट करें।
अगर आप सूची में शामिल विषय के अलावा किसी अन्य विषय पर चर्चा करना चाहते हैं, तो Post पर क्लिक करें

और अपना विषय और उस पर अपने प्रारंभिक विचार दें। सूची मे आपका विषय भी शामिल हो जाएगा। दूसरे पाठक आपके विचारों के बारे में क्या राए रखते हैं, लगातार देखा सुना फोरम पर आकर देखते रहें।

गुरुवार, २२ मई २००८

सच्चाई की तस्वीर दिखाती जन्नत

मौजूदा मसाला फिल्मों के दौर में फिल्मकारों की मजबूरी बन गई है कि उन्हें एक अच्छे मैसेज को ग्लैमर की चाश्नी में डूबो कर पेश करना पड़ता है, महेश भट्ट की जन्नत भी इसी का नमूना है।ये क्रिकेट की ही नहीं प्यार और पैसे की कहानी है। आज के हर युवा की चाहत है पैसा, गाड़ी, खूबसूरत घर और मनचाहा महबूब, लेकिन इन सब को हासिल करने के लिए वो कैसे हथकंडे अपना रहे हैं, महेश भट्ट ने युवा पीढ़ी के इस अंदाज से जुड़ी भावनाओं को बखूबी पड़ा है। फिल्म की शुरुआत में अखबारों की सुर्खियों बनी वो खबर याद आती है, जिसमें एक युवक ने अपने गर्लफ्रैंड को खुश करने के लिए लग्जरी कार चोरी करने के जुर्म में जेल की हवा खाई थी। फिल्म ऐसे ही एक युवक अर्जुन (इमरान हाशमी) की कहानी है, जो अपने पिता के असूलों की बजाए क्विक मनी में यकीन रखता है, जुए में हार के बाद जब अर्जुन क्रिकेट मैच बुकी के रुप में सफल होता है, तो फिर पैसे और सफलता का जुनून ऐसा चढ़ता है, कि अपनी मोहब्बत जोया (सोनल चौहान) को भी नजरअंदाज करने लगता है। फिल्म की शुरुआत में नवोदित डायरेक्टर कुनाल देशमुख ने गर्लफ्रैंड की खुशी के लिए गैरकानूनी कामों में उतरने की घटनाओं को कहानी में बखूबी पिरोया है। सोनम के पास पहले हाफ में करने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन सेकेंड हाफ के कुछ सीन्स में वह प्रभाव छोड़ती नजर आई। समीर कोचर भी अपने किरदार को दमदार निभा गए हैं, लेकिन फिल्म की यूएसपी सिर्फ इमरान हाशमी हैं। महेश भट्ट कैंप की पैदावार इमरान ने एक बार फिर उन पर गर्व करने का मौका दिया है। फिल्म के हर फ्रेम में उनके अलग अलग शेड्स देखने को मिलते हैं और प्रभावित करते हैं। इमरान अपने सपनों का पीछा करते हुए जुएबाज से सट्टेबाज और फिर मैच फिक्सर बन जाता हैं। केपटाउन पहुंचकर वह आतंकवादी गुट के सरगना जावेद शेख भाई के चंगुल में फंस जाता है। फिल्म का क्लाइमेक्स आप पर पहाड़ की तरह टूट सकता है, जो कहानी का सबसे जबरदस्त पहलू है। कहानी का अंत हो सकता है कुछ लोगों को पसंद न आए, लेकिन ये एक सकारात्मक संदेश देता है। विलेन के कैरेक्टर में जावेद शेख भी जंचे हैं। राजू सिंह का बैकग्राउंड स्कोर खास कर दूसरे हाफ में चेस सीन में काफी रोमांचक है। प्रीतम और कामरान अहमद का म्यूजिक भी ठीक है। भट्ट ने एक बार फिर पाकिस्तानी गाने का प्रयोग किया है। खैर इस मसाला मूवी में लपेट के दिए संदेश की खातिर इस एंटरटेनिंग मूवी को आप एक बार देख ही सकते हैं।

शुक्रवार, १६ मई २००८

मजेदार है भूतनाथ से फ्रेंडशिप

तारे जमीन के बाद बाक्स आफिस पर एकबार फिर परिवार खास कर बच्चों के देखने लायक फिल्म आई है। भूतनाथ आधुनिकता के दौर में पेरेंट्स और बच्चों में खत्म होती संवेदनाओं के साथ ही नि:स्वार्थ प्यार की कहानी बयान करती है। आपको अब नन्हें हीरोज का दबदबा मानने की आदत डालनी होगी। बीग बी को शाहरूख टक्कर दे सकते हैं या नहीं बाद की बात है लेकिन नन्हां अमन ये दम रखता है। ऐ चार फुट दो इंच के बदले ऐ छह फुट 2 इंच का डायलॉग अमिताभ की डॉयलॉग डिलवरी की हाइट पर जाकर बोलने के साथ ही अमन ने ये साबित कर दिया है। पूरी फिल्म दोनों के कंधों पर है और दोनों ने ही इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। दोनों एक दूसरे को पूरी तरह कम्पलीमेंट करते नजर आते हैं। एंट्री में भद्दे भूत के रूप में भी अमिताभ काफी डिसेंट लगे हैं। कहानी एक परिवार की है, जिसमें पापा शाहरुख ट्रांसफर के बाद गोआ पहुंचते हैं, जो जॉब के सिलसिले में खुद तो चले जाते हैं और नया घर संभालना होता है मम्मी जूही चावला और नन्हें बंकू यानि अमन सिद्दीकी को। उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं जब पता चलता है कि खूबसूरत घर पर डरावने भूत का कब्जा है। लेकिन नन्हां बंकू मम्मी के कहे मुताबिक भूत नहीं सिर्फ ऐंजल को जानता है। बस फिर वो डरने की बजाए उसको चैंलेज करता है और दोस्त बना लेते हैं। बच्चे आराम से फिल्म देख सकते हैं, क्यों कि भूतनाथ भाई भी इमोशनल हैं और बच्चों के प्यार से मोहित हो जाते हैं। अरे जनाब बिग बी सूटेड बूटेड भूत जो ठहरे। उनके भूत बनने की पीछे कहानी भी आज के समाज की तस्वीर को पेश करती है, जिसमें बच्चे बेहतर करियर के लिए पेरेंट्स की परवाह किए बगैर विदेश चले जाते हैं और उन्हें भूल जाते हैं। शाहरुख खान की 20 मिनट की मेहमान भूमिका के साथ ही प्रियाशंू भी दूयरे हाफ में ठीक लगे हैं। जूही चावला भी केयरिंग मां के किरदार को निभा गई हैं और बच्चे सतीश शाह को पंसद करेंगे। राजपाल यादव को वेस्ट किया गया है। नए डायरेक्टर विवेक शर्मा कहानी को संभालने में सफल हुए हैं। खास बात ये कि आजकल के जो बच्चे सफलता के लिए शॉट कट या मैजिक का सहारा चाहते हैं, भूतनाथ उन्हें अपनी जंग हिम्मत से लडऩे की सलाह देते हैं। तो बच्चो भूतनाथ से दोस्ती करनी है, तो आप मम्मी-पापा को मना ही लो। वैसे फिल्म को ओपनिंग एवरेज रही। अगर फिल्म कहीं जून की छुट्टियों में रिलीज होती तो बाक्स आफिस की तस्वीर अलग होती। म्यूजिक जरूर निराश करता है, लेकिन आखिर का गाना सुनने लायक है।