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राम गोपाल वर्मा आग के दर्द को भुला सकते हैं, क्योंकि सरकार राज उस धुएं को उड़ा सकता है। 'सरकार' की 'सरकार राज' से तुलना होना स्वभाविक है और होनी भी चाहिए।

स्टार कास्ट
अमिताभ बच्चन
अभिषेक बच्चन
एश्वर्या राय
तनिशा मुखर्जी
गोविंद नामदेव
रवि काले
डायरेक्टर
राम गोपाल वर्मा
शूटिंग लोकेशन
हैदराबाद
रामू ने सरकार राज को सरकार की तरह सॉलिड बनाने की कोशिश की है और काफी हद तक कामयाब भी रहे हैं। फिल्म की कहानी महाराष्ट्र की राजनीति पर केंद्र्ति है। अन्य राज्यों के दर्शक पहले से महाराष्ट्र के राजनैतिक ड्रामे की खबरों से दुखी हैं, उन्हें जरूर ये बात अखर सकती है। सरकार की कहानी सरकार और उसके विरोधियों के इर्द गिर्द घूमती थी, जबकि सरकार राज की कहानी उसकी सत्ता हथियाने की है। उसके लिए की गई साजिश ही कहानी का केंद्र बिंदू है, लेकिन अंत तक दर्शक को ये बात पता ही नहीं चलती और न ही फिल्मकार ने बताई है। ये राज क्लाइमैक्स में जाकर खुलता है, जब शंकर द्वारा दुशमनों को खत्म करने के बाद अचानक एक दिन कोई उसे मरवा देता है। फिर सरकार अपनी राजनीतिक सोच और ताकत का प्रयोग करते हुए असलियत का पता लगाता है, जो दर्शकों को चौंकाने के लिए काफी है। सरकार राज की कहानी सरकार की सत्ता प्राप्ती के साथ ही राजनीति सहित ताकत के हर क्षेत्र में परिवारवाद के सत्य को उजागर करती है। मूवी का सबसे दमदार पक्ष है इसका बैकग्राउंड स्कोर, जो हर सीन में दर्शकों की आंखें स्पाट खोल देता है। दरअसल पहली फिल्म में रामू ने सरकार की ताकत और उसके उसूलों के साथ खड़ा किया है, जबकि सरकार राज में वह नए दौर और पीढ़ी के मुताबिक समझौते करते नजर आते हैं। पहले जहां दुनिया में उनके फैसले को इंकार करने की हिम्मत खुद उनका बेटा भी नहीं दिखा सकता और ये हिमाकत करने पर अपने सगे भाई को भी मार देता है।
वहीं दूसरी में सरकार के पोते को सरकार के गिफ्ट ही पसंद नहीं आते खैर ये कहानी का हिस्सा है। सरकार राज में पूरी ताकत शंकर (अभिषेक) के हाथ में है और वह कोई बड़ा फैसला लेने के लिए सरकार (अमिताभ बच्चन) से बस सलाह मात्र करता है। 5 गांव के 40 हजार लोगों को विस्थापित कर बिजली प्रोजेक्ट लगाने का प्रस्ताव लेकर अनिता (ऐश्वर्या रॉय) सरकार के पास पहुंचती है, जो वो रिजेक्ट कर देता है, लेकिन शंकर इसे अपने राज्य के विकास के लिए अहम मानकर उन्हें मना लेता है। दूसरी कड़ी में सरकार के गॉडफादर राओ साहब से भी मुलाकात होती है, जिनका क्रांतिकारी पोता भी सरकार की सत्ता को चुनौती देता है। रामू की डार्क शेड फिल्म दर्शक को बांधे रखती है। बिग बी और अभि दोनों ही एक्टिंग के मामले में एक-दूसरे के सिर चढ़ कर बोलते हैं। ऐश का किरदार एक बिजनेस विमन है, जो दिग्गजों की राजनीति में पिस सा गया है। फिर भी जितने दृश्य उनके हिस्से आए है, उनको उन्होंने पूरी जिम्मेदारी से निभाया है। खास कर आखिरी सीन तक आपको इंतजार करना होगा। ऐश्वर्य राय पूरी फिल्म में एक असहाय बिजनेस वुमन बनी रहती हैं, जो सरकार और राजनीति के अखाड़ को देखकर हैरान होती रहती हैं। इसी बीच शंकर और अनिता के बीच प्रेम भी पनपता है, जो उसे क्लाइमेक्स पर ताकतवर बना देती है। चंद्र के किरदार में रवि काले ने बेहतरीन एक्टिंग की है, जिसे समिक्षकों ने पूरी तरह नजरअंदाज किया है। पहले हाफ में कहानी तेजी से बनती है, लेकिन दूसरे हाफ में रफ्तार कुछ धीमी है और ये कहानी की मजबूरी लगती है। दूसरी बात ये कि कहानी खुद-ब-खुद आगे बढ़ाने की बजाए रामू ने अमिताभ के मुंह से सारे राज खुलवाए हैं। चोट खाए शेर की मानिंद अंत में अमिताभ काफी प्रभावित करते हैं। पूरी फिल्म में साजिश रच रहे सभी विलेन तो मोहरा मात्र हैं, सच्चाई तो अंत में ही सामने आती है। फिल्म का क्लाइमेक्स आपको पिछली फिल्म सा लगेगा, लेकिन है बिल्कुल सिर पर पहाड़ टूटने जैसा। खास बात ये है कि आरजीवी ने सरकार राज की कहानी को सशक्त बनाने के साथ ही इस कड़ी की तीसरी फिल्म का प्लाट तैयार करने पर भी भरपूर मेहनत की है, जो फिल्म में सपष्ट नजर आती है। थिएटर से बाहर निकलते हुए, दर्शक इसी बात पर चर्चा करते नजर आते हैं। राजनीति में सक्रिय भूमिका न निभा कर भी किस तरह किंगमेकरों का किंगमेकर अपनी 'सरकार' चलाता है। ये देखने के लिए आपको सरकार राज देख लेनी चाहिए। हां पहली शर्त ये है कि आपने पहले सरकार देखी हो
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रेटिंग चिन्ह---*पैसा बर्बाद/ **बस ठीक ठाक है/ *** पैसा वसूल/ ****जरूर देखें/ ****बेहतरीन