कोई बात चले , गुलज़ार और जगजीत सिंह की नयी अल्बम है , इससे पहले ये संगम अल्बम " मरासिम" मे सुनने को मिला था । गुलज़ार कि गजलों , नज़मो और त्रिवेनियों को जगजीत ने बखूबी स्वर्बध किया है और गाया भी लाजवाब है , अल्बम एक त्रिवेनियों से शुरू होती है -
जिंदगी क्या है जानने के लिए
जिंदा रहना बहुत ज़रूरी है
आज तक कोई भी रहा तो नही ....
बस....फिर तो एक जादू सा चल पड़ता है...... आओ हम सब पहन ले आईने
सारे देखेंगे अपना ही चेहरा
सबको सारे हँसी लगेंगे यहाँ .....
ग़ज़ल आप जो इन दिनों यहाँ होते हलके मूड की है तो सहमा सहमा बहुत ही उदास कर जाती है ..... महसूस कीजिये जरा एक पल देख लूं तो उठता हूँ जल गया सब जरा सा रहता है ... और भी कुछ कमाल की गज़लें है। जो लोग जगजीत को सुनते आये हैं उन्हें याद होगा बहुत पहले दूरदर्शन पर आने वाले सीरियल हैलो जिंदगी का टाइटिल सोंग, वह भी इस अल्बम आप सुन पाएंगे । कुल मिल कर ग़ज़ल के चाहने वालों के लिए एक नायाब तोहफा है ये अल्बम ..... जरूर सुनियेगा .... जाते जाते...एक त्रिवेणी और...
उम्र के खेल मे एकतरफा है ये रस्साकशी
एक सिरा मुझको दिया होता तो कोई बात भी थी
मुझसे पर्दा भी है और सामने आता भी नही
बुधवार, 9 मई, 2007
कोई बात चले
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2 टिप्पणियाँ:
संजीव जी,सब से आप का स्वागत है नारद पर ।जहाँ तक गुलज़ार और जगजीत सिंह जी की गजलों की बात है तो भाई उन की गजलें हमे भी पसंद है।उन के बारे दी जानकारी पढ कर अच्छा लगा।
हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है। नियमित लेखन हेतु मेरी तरफ से शुभकामनाएं।
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