महाराष्ट्रा के कल्याण इलाके में पुलिस को सारे cybercafe बंद करवाने पडे । क्यों ? कुछ खास तत्वों को orkut के website पर दी आयी किसी जानकारी से कुछ आपत्ति थी और उन लोगों ने अपना ग़ुस्सा कुछ cyber cafes में बडे पैमाने पर तोड़ फोड़ कर दिखाया । अखिर क्या जताना चाहते हैं ये संस्कृति के स्वयम्भू पहरुवे , कब तक लगते रहेंगे ये विचारों की अभिव्यक्ति पर इस तरह से रोक , कभी किसी सेंसर से प्रमाणित फिल्म का विरोध , तो कभी किसी कलाकार की रचनात्मक अभिव्यक्ति पर बवाल । अखिर कौन होते हैं ये , जो निर्धारित करें की क्या संस्कृती के दायरे में है और क्या नही - शिल्पा शेट्टी कि किस प्रकरण को लेकर शोर मचने वालों को इन दिनों हर चैनल पर प्रसारित हो रहे कच्छे बनियानों के विज्ञापनों में कोई खोट नज़र नही आती ? ftv पर पर प्रतिबंध लगा दिया पर अश्लील cds का क्या, जो बाजारों मे खुले आम धड़ल्ले से बिक रही है , जो बच्चों तक की पहुंच में आसानी से उपलब्ध पर इन्हें ये सब नही दिखता , पार्कों में बैठे जोडों पर ये डंडे चलाते हैं मगर बलात्कारियों और दहेज़ लोभी पतियों के खिलाफ ये खामोश रहते हैं, विदेशी कम्पनियों के खिलाफ नारे लगाते हैं , मगर खुद विदेशों में घुमाने का लुत्फ़ उठाते हैं, अखिर क्या पैमाना है इनका ? क्या हमारी सभ्यता , हमारी संस्कृती का मात्र इतना ही अस्तित्त्व है कि एक स्वतात्र रचनात्मक अभीव्यक्ति से उसकी नीवें हिल जाती है , विचारों की स्वतन्त्र अभीव्यक्ति हम सबका मूलभूत अधिकार है , इसके बिना कला का कोई अस्तित्व ही नही है। अब ये हम पर निर्भर है कि हम एक होकर इन तालिबानी ताकतों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करें , या फिर चुप रह कर इनकी मंमानिओं को और बढावा दे ।
आप इस विषय में क्या सोचते हैं , लिखियेगा । यदि आप इस बारे में पहले कुछ लिख चुके हैं तो उसका लिंक दे ताकि जिन्होंने उसे नही पढा वो भी पढ़ सकें ।
देखा सुना के ३ अंक में आपका स्वागत है .
रविवार, 3 जून, 2007
भारत के तालिबानी - संस्कृति के स्वयम्भू पहरुए
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साप्ताहिक संपादकीय
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4 टिप्पणियाँ:
संजीव जी, यह स्वयंभू ही हैं। लेकिन चुप रहकर बडा वर्ग इन्हें मौन समर्थन देता है और अपना नुमाइंदा बना लेता है। आप www.dhaiakhar.blogspot.com भी देखें। शुक्रिया।
शर्म आ रही है और क्या कहें।
राग
http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=196
http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=192
http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=186
http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=181
ये कुछेक लिंक है. मगर लिखा इससे भी कहीं ज्यादा है. सारे लिंक दूँ क्या? :)
बिलकुल ठीक कह रहे है..हम सबको मिल कर इनका विरोध करना ही पड़ेगा...आखिर कब तक इनकी तानाशाही चलती रहेगी?
सुनीता(शानू)
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