शनिवार, 9 जून, 2007

कितने कितने आरक्षण

आरक्षण की आग एक बार फिर भड़की । इस बार जला राजस्थान , और लपटें पहुँची दिल्ली , हरियाणा और उत्तर भारत के कुछ और इलाकों तक। आख़िर कब तक फूंकते रहेंगे , इस देश के के युवावों को जिन्दा , और सेंकते रहेंगे अपने राजनितिक स्वार्थ की रोटियां , हमारे राजनेता । इस देश की गंदी राजनीती का ये खौफनाक चेहरा अब डराने लगा है , कितने वर्ग कितने धर्म , कितनी जातियाँ , कितने कितने आरक्षण , किस किस को देंगे आरक्षण ?

वो दिन कब आयेगा जब इस देश का युवा खुद पर यकीन करने लगेगा , उसे आरक्षण के नाम पर भीख नही मांगनी पडेगी , वह जति , धर्म , रंग के नाम पर बँटा नही होगा , और उनकी ताकत के आगे स्वार्थी राजनेताओं को घुटने टेकने पड़ेंगे । कब वो दिन आयेगा जब इस देश का युवा उठ कर कहेगा कि नही चाहिऐ हमे आरक्षण की बैसाखियां , हम सक्षम है खुद में , हम तैयार हैं अपनी और देश की तकदीर बदलने के लिए ... दोस्तो आगे बढ़ो और कमान संभालो , महज प्यादे ना रहो , वजीर बनो, राजा बनो, ताकतवर बनो ।

1 टिप्पणियाँ:

sunita (shanoo) ने कहा…

क्या बात है आपकी दलील की दाद देनी होगी,..मगर सजीव जी ज्यादातर दुनिया को मुफ़्तखोरी की लत पड़ गई है...क्या किया जाये भिखारियो ने भीख मांग-मांग कर कोठीयाँ खड़ी कर ली है मगर किसी मंदिर के सामने आपको भीख मांगते नजर आयेंगे...वही हाल है देश का इस आरक्षण की बदौलत हमारा देश आज भी पिछडा हुआ है योग्य की जगह अयोग्य उम्मीदवार को सीट मिल जाती है....

सुनीता(शानू)