रविवार, 10 जून, 2007

तो क्या बुरे गब्बर ने मेरे अच्छे जय को मार दिया माँ ...

उन दिनों मैं महज चार साल का था , पिताजी की पोस्टिंग सिकंदराबाद से दिल्ली हो गयी थी , और उन्होने माँ और मुझे अपने पास बुला लिया था , घर में एक जर्मन ब्रांड का रेडियो था , जिसने मुझे लता , आशा, रफी, मुकेश, आदि से जोडा ( वो रिश्ता आज भी कायम है ) । उन दिनों जब मोहल्ले में कोई byscope वाला आता था तो सारे बच्चे उसके पीछे पीछे हो लेते थे , इक्का दुक्का घर थे जहाँ black & white टीवी हुआ करता था, शाम होते ही वहाँ मेला लग जाता था , फिल्मे देखना तो किसी विलासिता से कम नही हुआ करता था । एक दिन जिद्द और मिन्नतें कर कर के मैंने और माँ ने पिताजी को राजी कर ही लिया और हम भी चले उस दिन - विलासिता का स्वाद चखने । वो पहली फिल्म जो मैंने थियटर पर देखी वो थी गयी सदी की महान फिल्म - शोले । अब वो फिल्म कितनी दमदार थी इस बात का अंदाजा मेरे माता पिता को इस बात से ही हो गया था कि उनका चार साला शरारती लड़का पूरी साढ़े तीन घंटे की उस फिल्म को "चुप " बैठ कर देखता रहा ... यहाँ तक की जब फिल्म का विलन गब्बर सिंह उर्फ़ अमजद खान , हीरो ,जय यानी अमिताभ बच्चन को मार देता है , तो वीरू यानी धर्मेंद्र की साथ साथ मैं भी ख़ूब रोया था । जय की मौत का मुझे इतना अफ़सोस हुआ कि घर आकर भी मैं उदास रहने लगा , अक्सर माँ से पूछता " तो क्या बुरे गब्बर ने मेरे अच्छे जय को मार दिया माँ ..." माँ समझाती कि बेटा वो तो बस फिल्म है , जय सच मे थोड़ी ना मरा है, पर मुझे भला कैसे यकीन हो। आखिरकार हार कर पिताजी को मुझे अमिताभ की एक और फिल्म "दोस्ताना" दिक्लानी पडी , तब जाकर मुझे कुछ तसल्ली हुई थी ।


वक़्त का पहिया पूरा घूम गया है , आज पूरे २९ साल बीत चुके हैं ... अब इसे इत्तेफ्फक ही कहिये कि आज मेरा बे ता पूरे ४ साल का हो चका है ... और राम गोपाल वर्मा कोशिश कर रहें हैं " शोले " का जादू एक बार फिर चलाने की। अब वो कितने कामयाब होते हैं इस बात की कौसौटी मेरे लिये तो यही रहेगी कि ये फिल्म मेरे बेटे को बाँध कर रख सकती है या नही ... वैसे जहाँ तक शरारती होने का सवाल है वो मेरे से दस कदम आगे हैं ... यकीनन रामू जी के लिए चुनौती कड़ी होगी ....

4 टिप्पणियाँ:

manya ने कहा…

bahut sahajataa se pesh kiya aapne yaadon ke jharokhe ko.. chunautii waakai kadi hai.. waise bhi aaj kal ke bachhe jyada samajhedaar hn puraani peedhi se..

Shrish ने कहा…

हा हा, फिल्म देखकर बताना कि आपका बच्चा तीन घंटे चुप बैठा या नहीं। अगर बैठ गया तो समझो फिल्म हिट है। :)

Udan Tashtari ने कहा…

रामू जी प्रति मेरी शुभकामनायें कि आपका बेटा उन्हें कामयाबी की नई मंजिलें दें. बताना जरुर, क्या हुआ.

अनूप शुक्ला ने कहा…

सही है! ये लिटमस टेस्ट होगा नई शोले का!