मंगलवार, 12 जून, 2007

जुम्मन मियां चौपाल पर १

जुम्मन का पड़ोसी -- " अपने सहब्जदे को ज़रा संभालो जुम्मन ... अभी से लुच्चा हुआ जा रहा है ... कल उसने मेरी बीबी को पत्थर मारा"



जुम्मन -- " लगा ? "



पड़ोसी ---- ( हैरानी से ) " नही "



जुम्मन ----- " फिर वो किसी और की औदलाद होगी जनाब ... मेरे सहब्ज़ादे का निशाना कभी नही चूकता ..."







संगीत चर्चा " झूम बराबर झूम "





शाद की इस नयी फिल्म का संगीत लाजवाब है । गुलज़ार साब फिर एक बार पूरे फॉर्म में हैं । शंकर ने तर्जें बनाने में कोई कसर नही छोडी । तमाम विवादों के बावजूद शीर्षक गीत तीनों अवर्तानो मे ज़बर्दस्त लगता है । " टिकट thollywood " की ताल शानदार है ... rock 'n'roll करता हुआ आता है गीत " किस ऑफ़ लव " और झुमने पर मजबूर कर देता है। " हलके हलके " सुन्दर शब्द रचना है ... ये ऐसा गीत है जो लंबे समय तक आपको भायेगा ... तो बस बेहिचक ले आइये ... नाचने की तैयारी कर लीजिये और गाते जयिये .... झूम बराबर झूम बराबर झूम बराबर झूम........



देखा सुना रेटिंग **** बहुत अच्छा

3 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari ने कहा…

जुम्मन बेचारा. :)

Divine India ने कहा…

भाई वाह…।
गुलजार साहब की बात तो तब भी वही थी जो आज है…सही बताया!!!

अनूप शुक्ला ने कहा…

सही है!