शुक्रवार, 29 जून, 2007

जुम्मन मियां चौपाल पर २

जुम्मन - ( भिखारी से ) - " क्या बात है भैया , दिखे नही बहुत दिनों से , दरवाज़े पर तुम्हारी खट खट नही हुई बडे दिनों से "



भिखारी - " अरे मियाँ , हमने अपनी वो गली अपने जमाई राजा को देहेज में दे दी , लड़की ब्याही है तो कुछ ना कुछ तो देना ही था ना , अपनी गली उसे दे दी .... वैसे भी अब मेरी उम्र हो चली है ...."



जुम्मन - " लो.... हम तो अब तक उसे अपनी गली समझते थे .....आज पता लगा कि गली तो तुम्हारी थी.... चलो मुबारक हो ....."

4 टिप्पणियाँ:

sunita (shanoo) ने कहा…

वाह क्या बात है...:)

Udan Tashtari ने कहा…

:)

राकेश खंडेलवाल ने कहा…

सतसैया के दोहरे ज्यों नाविक के तीर
देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर

Nishikant Tiwari ने कहा…

सामने सब के स्वीकार करता हूँ
हिन्दी से कितना प्यार करता हूँ
कलम है मेरी टूटी फूटी
थोड़ी सुखी थोड़ी रुखी
हर हिन्दी लिखने वाले का
प्रकट आभार करता हूँ
आप लिखते रहिए
मैं इन्तज़ार करता हूँ ।
NishikantWorld