पिछले दिनों मेरी एक ओर्कुट मित्र अनिता कुमार का scrap आया, लिखा था "खंडाला चलोगे, टिकेट मेरे ब्लोग पर है" पढ़ कर देखा तो पाया कि वह अपने कुछ ओर्कुट मित्रों के साथ खंडाला घूम कर आयी है, और अपना यात्रा संस्मरण सब के साथ बाँट रही थी, इसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। पिछले दिनों ओर्कुट को लेकर तमाम तरह की बातें हुई, कौशाम्भी लायक की हत्या, और अभी हाल में ही हुई अदनान के अपहरण और निर्मम हत्या ने ओर्कुट को फिर कटघरे मे ला खड़ा किया है, मिडिया ने तो इन घटनाओं को कुछ इस तरह परोसा की ओर्कुट आम जनता की नज़र मे एक खलनायक बन कर उभर आया, तमाम तरह की चेतावनियाँ दी जाने लगी, जैसे छोटे बच्चों को सिखाया जाता है कि अजनबियों से बात नही करना वगैरह वगैरह, कुछ लोगों ने इसे बंद करने की बात तक उठा डाली, जैसे बिल्ली को देख चूहा आंख बंद कर ले , कुछ ने cyber कैफे में तोड़ फोड़ भी कर डाली, दरअसल जिन हत्यायो कि हम बात कर रहे हैं, इन मे से एक प्रेम मे इर्षा के और दूसरी फ़टाफ़ट पैसा कमाने के उद्देश्य से हुई, क्या अगर ओर्कुट नही होता तो यह सब नही होता, इस तरह की खबरों से अखबारों के पन्ने भरे रहते हैं, अगर ओर्कुट को comman कडी के रुप में ना देखे तो यह दो साधारण घटनाएं हैं, जो अगर ओर्कुट नही भी होता तो घटित होती, तो क्या मिडिया का इस तरह सारा दोष ओर्कुट पर मढ़ देना उचित है क्या।
मैं जो ऊपर उदहारण दे रहा था अनिताजी के लेख का, यह साबित करता है ओर्कुट के मध्यम से कुछ ऎसी और ऎसी बहुत सी अच्छी बातें भी संभव हो रही है, टुकड़ों टुकड़ों मे बंटते समाजिक परिवेश को ओर्कुट जैसे मित्र समुदाय जोड़ने का काम कर रहे हैं, अगर मिडिया नकारात्मक पहलू दिखाकर किसी की छवि को धूमिल करती है तो उसी मिडिया का यह भी फ़र्ज़ बनता है की उसके सकारत्मक पक्ष को भी सबके सामने रखे
मंगलवार, 25 सितंबर, 2007
तेरा क्या होगा रे - ओर्कुट
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8 टिप्पणियाँ:
बिलकुल सही कहा आपने। इन्हें लगता है कि ऑरकुट को बैन लगाकर देश में हो रहे अपराधों का खात्मा कर देंगे।
हर सुविधा का सही गलत इस्तेमाल होता रहता है। आपने सही कहा की मीडिया का काम उसके मजबूत और कमजोर दोनों पहलुओं को जनता के सामने प्रस्तुत करना है।
आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.
aap sahi kah rahe hain.orkut ke aane se pahle bhi yeh sub hota tha.
ghughutibasuti
कोई भी चीज सिर्फ़ उपयोग के लिए होती है ,यह हम पर होता है कि हम उसका सकारात्मक उपयोग करते हैं या फ़िर नकारात्मक!
उस चीज को हटाने से हमारी नकारात्मक मानसिकता तो खत्म नही हो जाएगी।
जी, हर चीज की तरह सिक्के के दो पहलू हैं-अच्छा और बुरा. दोनोम ही उजागर होने चाहिये ताकि लोग आनन्द भी ले लें और सतर्क भी रहें.
अच्छा मुद्दा लिया, आभार.
सजीव जी हमें खुशी है कि आपने इतने मह्त्तवपूर्ण मुद्दे को उठाया। सही कह रहे हैं मिडिया को बहुत जिम्मेदार तरीके से अपना काम करना चाहिए। 'अपराधी कौन' लेख में भी हमने यही बात कही थी, अदनान कत्ल को ले कर और बताया था कैसे ऑर्कुट नहीं और बहुत से कारण थे अदनान ह्त्याकांड में……॥
आप को बधाई
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