पिछले हफ्तों बड़ी फिल्मो का अभाव रहा,बड़े दिनों बाद एक धमाके डर फ़िल्म आई,जोधा अकबर,तमाम अच्छी बातों के होने के बाद भी भारतीय लोकतंत्र हावी रहा और फ़िल्म को मिलाजुला response ही मिल सका,फ़िर जैसा की हर बड़े बैनर की फ़िल्म के रेलेअसे के बाद होता,बॉक्स ऑफिस पर फिल्मी सन्नाटा,सो फ़िर लंबा इन्तजार करना पड़ा,इन्तजार इसलिए भी करना था की अपने junior showman को अपने अस्तित्व की आखिरी लड़ाई लड़नी थी, खैर जैसे तैसे वो शुक्रवार भी आ ही गया,पहुँचा देखने, फ़िल्म का नाम black n white,निर्देशक -सुभाष घई कलाकार-अनिल कपूर,शेफाली शाह,अनुभव सिन्हा,हबीब तनवीर आदि..
एकबारगी तो लगा की घई पागल हो गए है,क्या विषय उठा लिए,पर bottom line यह है कि घई के तरकश में बाण अभी बाकी है.
कहानी एक ऐसे लड़के कि है जो गुजरात के दंगों में अपने परिवार को खो चुका होता है,उसके जेहन में बस यही रहता है कि हिंदुस्तान दुश्मन है और मुसलमानों के लिए यहाँ जगह नहीं है,उसका उद्देश्य १५ अगस्त को लाल किला में फिदायीन हमला करना है,जब वो बिस्फोत के १५ दिनों पहले चांदनी चौक पहुँचता है तो यहाँ उसकी मुलाकात होती है जाकिर हुसैन कालेज के प्रफेसर अनिल कपूर और उनकी पत्नी शेफाली शाह से,धीरे धीरे इनके साथ रहते रहते उसे अहसास होता है कि जो रास्ता उसने अख्तियार किया है वो कदापि ग़लत है,जो लोग जिहाद के नाम पर ऐसे हमले करते हैं वो असल में अपना उल्लू सीधा कर रहे होते हैं,
फ़िल्म में आतंकवाद के जड़ को दिखाते हुए यह बताने की कोशिस की गई है की आतंकवाद कोई भौतिक वस्तु या इन्सान नहीं है वरन एक विचार है जिसे वैचारिकता के माध्यम से ही ख़त्म किया जा सकता है.
अदाकारी-अनिल,शेफाली बेहतरीन राहे तो थियेटर सम्राट हबीब साहब usp,आज का छोरा अनुभव सिन्हा अपने किरदार के साथ इमानदारी बरतने में सफल रहा,
संगीत- बहुत स्तरीय नहीं रहा,पर back ground score औसत रहा cinematography- बेहतरीन,भव्य सेट्स के बरक्स चांदनी चौक की तंग गलियों को यथार्थ रूप में देखना सुखद रहा
निर्देशन- बहुत खुशी की बात है की केवल रूमानी सपने बेचने वाले भी अब यथार्थ को जानने लगे हैं, घई के कायल हो गए,१० में से ८ अंक
कुल मिलकर एक ऐसी फिल्म जिसको देखने के अनेक कारन नहीं देखने का सिर्फ एक,लटके झटकों का अभाव
अन्तिम बात- जरुर देखें
आलोक सिंह "साहिल"
शुक्रवार, 14 मार्च, 2008
साहिल का नजरिया
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5 टिप्पणियाँ:
वाह आप तो बहुत अच्छे समीक्षक निकले ...लगता है यह पिक्चर देखने जाना पड़ेगा फ़िर देख के बताते हैं कि आपने सही लिखा या ग़लत :)
जमे रहो
really good movie, but i feel a bit outdated though....
वाह साहिल! आप तो फिल्म-समीक्षक भी हैं! बहुत अच्छे!
- अजय यादव
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